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ब्रिक्स को अब परिपक्व संगठन की तरह काम करना होगा: विश्लेषण
भारत-चीन के बीच समझौते से ब्रिक्स को नई दिशा मिल सकती है, लेकिन 'गैर-पश्चिमी' एजेंडा तभी सफल होगा जब वह वैश्विक संघर्ष समाप्त करने पर समान ध्यान दे।
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ब्रिक्स संगठन को अब एक परिपक्व और जिम्मेदार खिलाड़ी की तरह कार्य करने की आवश्यकता है। समूह के विस्तार और बढ़ती वैश्विक प्रभाव के साथ, इसे अपनी नीतियों और कार्यप्रणाली में अधिक परिपक्वता प्रदर्शित करनी होगी।
ब्रिक्स के आंतरिक गतिविधियों में भारत और चीन की समझदारी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इन दोनों बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच सहयोग की रणनीति संगठन की सामूहिक शक्ति को निर्धारित करेगी और इसकी वैश्विक प्रासंगिकता को मजबूत करेगी।
हालांकि, पश्चिमी वर्चस्व के विकल्प के रूप में ब्रिक्स का 'गैर-पश्चिमी' एजेंडा तभी सार्थक साबित होगा जब वह केवल आर्थिक स्थिरता पर ही नहीं, बल्कि वैश्विक संघर्षों को समाप्त करने पर भी समान रूप से ध्यान केंद्रित करे। यह दोहरी प्रतिबद्धता ही इसे विश्वास और वैधता प्रदान करेगी।
भविष्य में ब्रिक्स की सफलता इसकी सदस्य देशों की एकता और दीर्घकालिक दृष्टिकोण पर निर्भर करेगी। संगठन को अपनी वैचारिक नींव को मजबूत करते हुए व्यावहारिक समाधान खोजने होंगे जो सभी सदस्यों के हितों को संतुलित करें।