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भारत की अध्यक्षता में BRICS घोषणापत्र में भुगतान धोखाधड़ी पर चिंता
BRICS देशों के संयुक्त घोषणापत्र में पहली बार सीमापार भुगतान धोखाधड़ी को लेकर औपचारिक चिंता व्यक्त की गई है। यह घोषणा डिजिटल लेनदेन में बढ़ते खतरों को संबोधित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
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BRICS देशों की दिल्ली घोषणा में भुगतान प्रणालियों के जरिए होने वाली सीमापार धोखाधड़ी की समस्या को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की गई है। इस तरह की घोषणा इस स्तर के अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहली बार की गई है, जो डिजिटल वित्तीय अपराधों की बढ़ती गंभीरता को दर्शाता है।
भारत, ब्राजील, रूस, चीन और दक्षिण अफ्रीका समेत BRICS सदस्य देश अपने यहां के वित्तीय संस्थानों में बढ़ती धोखाधड़ी की घटनाओं से जूझ रहे हैं। विशेषकर क्रॉस-बॉर्डर लेनदेन में साइबर अपराधियों की गतिविधियां काफी बढ़ गई हैं।
इस घोषणापत्र के माध्यम से BRICS देश सूचना साझाकरण, नियामक समन्वय और तकनीकी सहयोग को मजबूत करने का संकल्प लिए हैं। इसके अलावा देशों के बीच वित्तीय सुरक्षा मानकों को सामंजस्यपूर्ण बनाने पर भी जोर दिया गया है।
विश्लेषकों के अनुसार यह पहल डिजिटल अर्थव्यवस्था में विश्वास बनाए रखने के लिए आवश्यक है। BRICS जैसे प्रभावशाली देशों के इस कदम से अन्य क्षेत्रीय समूहों में भी इसी तरह की पहल की प्रेरणा मिल सकती है।