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BRICS की अलग मुद्रा के प्रस्ताव पर विदेश मंत्रालय का स्पष्ट रुख
भारत के विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि BRICS देशों के लिए डॉलर से स्वतंत्र एक सामान्य मुद्रा लाने का कोई तत्काल प्रस्ताव नहीं है। हालांकि, समूह सदस्य राष्ट्रों के बीच स्थानीय मुद्राओं में व्यापार को प्रोत्साहित करने पर विचार-विमर्श जारी है।
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विदेश मंत्रालय के सचिव सुधाकर दलेला ने मंगलवार को कहा कि BRICS समूह ने अपनी सामान्य मुद्रा स्थापित करने के लिए कोई औपचारिक योजना तैयार नहीं की है। दलेला के बयान से यह स्पष्ट हुआ कि इस विषय पर चल रही चर्चाएं अभी प्रारंभिक चरण में हैं।
विदेश मंत्रालय के अधिकारी ने बताया कि BRICS देश आर्थिक लेनदेन को सुगम बनाने के लिए अपनी-अपनी स्थानीय मुद्राओं के उपयोग को बढ़ावा देने पर केंद्रित हैं। इस कदम से व्यापार में होने वाली विनिमय दर की अनिश्चितता को कम किया जा सकता है और लेनदेन की लागत में भी कमी आ सकती है।
BRICS के सदस्य देश भारत, ब्राजील, रूस, चीन और दक्षिण अफ्रीका अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय व्यवस्था में अपनी भूमिका को मजबूत करने की दिशा में काम कर रहे हैं। हालांकि, एक समान मुद्रा की स्थापना जटिल आर्थिक और राजनीतिक मुद्दों से जुड़ी है जिस पर सर्वसहमति तक पहुंचना चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि स्थानीय मुद्राओं में व्यापार को बढ़ावा देने का कदम वर्तमान में अधिक व्यावहारिक और संभावनाशील दिख रहा है। यह दृष्टिकोण BRICS देशों को अपनी आर्थिक स्वतंत्रता बढ़ाने और पारस्परिक व्यापार को मजबूत करने में सहायक हो सकता है।