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ब्रोकरों के लिए यूपीआई खर्च बड़ी चुनौती: निथिन कामथ की चेतावनी
जेरोधा के संस्थापक निथिन कामथ ने कहा है कि अगर ब्रोकरों को हर बार ग्राहकों के खाते में पैसा आने पर यूपीआई शुल्क देना पड़े, चाहे व्यापार हो या नहीं, तो यह टिकाऊ नहीं होगा।
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शेयर बाजार में ऑनलाइन ट्रेडिंग सेवा प्रदान करने वाली कंपनियों के लिए यूपीआई मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) एक बड़ी समस्या बन सकता है। जेरोधा के संस्थापक और सीईओ निथिन कामथ ने इस मुद्दे पर अपनी चिंता व्यक्त की है कि यदि ब्रोकरों को हर बार ग्राहक द्वारा यूपीआई के जरिए खाते में धन जमा करने पर शुल्क देना पड़े, भले ही ग्राहक बाद में कोई व्यापार न करे, तो यह व्यवसाय के लिए टिकाऊ नहीं रहेगा।
कामथ के अनुसार, यूपीआई के माध्यम से लेनदेन पर लगने वाले खर्च को लंबे समय तक सहन करना ब्रोकरों के लिए संभव नहीं होगा। उन्होंने सवाल उठाया है कि अगर प्रत्येक डिपोजिट पर खर्च आता रहे, तो यह मॉडल कितने समय तक चल पाएगा, खासकर जब ग्राहक संभावित व्यापार न करे।
यह टिप्पणी भारत में डिजिटल भुगतान प्रणाली के विस्तार और ब्रोकिंग सेवाओं में यूपीआई के उपयोग को लेकर एक महत्वपूर्ण सवाल उठाती है। ब्रोकरों का कहना है कि ऐसी स्थिति में उन्हें अपने ग्राहकों के लिए विकल्प सीमित करने पड़ सकते हैं।
यह मुद्दा डिजिटल पेमेंट सेक्टर और शेयर बाजार की सेवा प्रदान करने वाली कंपनियों के बीच संतुलन बनाने की आवश्यकता को दर्शाता है, ताकि दोनों पक्ष स्थिर और लाभकारी ढंग से काम कर सकें।