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तिरुवनंतपुरम के तटों पर भूरी मसल्स से जीविका चलती है

विझिंजम मछली पकड़ने के बंदरगाह से लेकर क्षेत्र के समुद्री भोजन बाजारों तक, भूरी मसल्स का व्यापार हजारों गोताखोरों की आजीविका का आधार बना हुआ है। समुद्र की मौसमी भरपूरता पर निर्भर यह समुदाय पीढ़ियों से इसी पारंपरिक व्यवसाय में संलग्न है।

LSN India · 29 October 2026

तिरुवनंतपुरम के तटों पर भूरी मसल्स से जीविका चलती है

तिरुवनंतपुरम के तटीय इलाकों में भूरी मसल्स की खेती और संग्रहण न केवल एक आर्थिक गतिविधि है, बल्कि यह हजारों परिवारों की आजीविका का मुख्य स्रोत बन गई है। विझिंजम मछली पकड़ने के बंदरगाह पर होने वाली नीलामियों में भूरी मसल्स की भारी मांग रहती है, जहां स्थानीय गोताखोर अपनी पकड़ को बेचते हैं। ये मसल्स केरल के विभिन्न समुद्री भोजन बाजारों तक पहुंचती हैं और क्षेत्रीय खाद्य आपूर्ति श्रृंखला का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।

गोताखोरों का समुदाय पीढ़ियों से समुद्र पर निर्भर है और भूरी मसल्स संग्रहण उनका प्रमुख कौशल है। समुद्र की मौसमी भरपूरता के साथ-साथ मसल्स की उपलब्धता में उतार-चढ़ाव होता है, जिससे इन कारीगरों की आय भी प्रभावित होती है। स्थानीय बाजार में मसल्स की कीमत में मांग-आपूर्ति के आधार पर परिवर्तन होता है।

विझिंजम और इसके आसपास के क्षेत्रों में यह पारंपरिक व्यवसाय न केवल व्यक्तिगत आय का स्रोत है, बल्कि क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था में भी महत्वपूर्ण योगदान देता है। समुद्री संसाधनों का सतत उपयोग सुनिश्चित करना इस समुदाय की भविष्य की आजीविका के लिए आवश्यक है। भूरी मसल्स से जुड़ा यह उद्योग तिरुवनंतपुरम की सांस्कृतिक विरासत और आर्थिक पहचान का एक अभिन्न अंग बना हुआ है।