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कैंसर की दवाओं में आएगी कमी, लेकिन महंगी दवाएं रहेंगी महंगी

राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण ने 543 कैंसर दवा ब्रांडों के अधिकतम खुदरा मूल्य में संशोधन किया है। सरकार द्वारा व्यापार मार्जिन को सीमित करने के बाद यह कदम उठाया गया है।

LSN India · 29 October 2026

राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (एनपीपीए) ने 543 कैंसर दवा ब्रांडों और विभिन्न पैकेजिंग आकारों के अधिकतम खुदरा मूल्यों में संशोधन किया है। सरकार द्वारा 137 दवाओं पर व्यापार मार्जिन को सीमित किए जाने के पश्चात् यह नई कीमत निर्धारित की गई है। इस कदम का लक्ष्य कैंसर रोगियों के लिए दवाओं को अधिक सुलभ बनाना है।

हालांकि, मूल्य संशोधन के बावजूद सबसे महंगी कैंसर दवाओं पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। ये दवाएं सरकार की मूल्य नियंत्रण सूची में शामिल नहीं हैं, जिससे निर्माता कंपनियां अपनी इच्छानुसार कीमत निर्धारित करती रहेंगी। इसका अर्थ यह है कि सबसे उन्नत और नई कैंसर चिकित्सा दवाएं मरीजों के लिए वित्तीय रूप से चुनौतीपूर्ण बनी रहेंगी।

इस नीति का असर मध्यम आय वर्गीय रोगियों पर पड़ेगा, जो मूल्य-नियंत्रित दवाओं से लाभान्वित होंगे। साथ ही, जो दवाएं अब सस्ती हुई हैं, वे अधिकतर पारंपरिक कैंसर उपचार में उपयोग की जाती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय आंशिक राहत ही दे सकता है, क्योंकि नवीनतम और अधिक प्रभावी दवाएं अभी भी असाध्य कीमत पर उपलब्ध रहेंगी।