World · India Bureau
कैंसर की 543 दवाओं में 90% तक मूल्य में कटौती, महंगी दवाओं पर सवाल
राष्ट्रीय फार्मास्यूटिकल मूल्य निर्धारण प्राधिकरण ने कैंसर की दवाओं पर व्यापक मूल्य नियंत्रण लागू किया है। लेकिन कुछ अत्यधिक मंहगी दवाओं पर कोई कीमत राहत नहीं दी गई है, जिससे रोगियों के लिए उपचार की कीमत पर सवाल उठ गए हैं।
LSN India ·

राष्ट्रीय फार्मास्यूटिकल मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (एनपीपीए) ने हाल ही में कैंसर उपचार की 543 दवाओं की कीमतों में संशोधन किया है। इस निर्णय के तहत कई दवाओं की कीमतों में 90 प्रतिशत से अधिक की कमी की गई है, जिससे भारतीय रोगियों को कैंसर चिकित्सा सुलभ बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
हालांकि, एनपीपीए के इस कदम के बावजूद कुछ जीवन रक्षक दवाओं को इस मूल्य नियंत्रण से बाहर रखा गया है। कीट्रूडा जैसी आयातित और अत्यधिक मंहगी दवाओं पर कोई मूल्य संशोधन नहीं किया गया है, जो हजारों रुपये प्रति डोज की कीमत पर उपलब्ध है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों और रोगी संगठनों का कहना है कि ऐसी महंगी दवाओं पर भी नियंत्रण की आवश्यकता है ताकि आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को भी उन्नत कैंसर उपचार मिल सके। वर्तमान में, भारत में कई कैंसर पीड़ित आर्थिक बाधाओं के कारण प्रभावी दवाओं से वंचित रह जाते हैं।
एनपीपीए के मूल्य निर्धारण नीति के तहत केवल सूचीबद्ध दवाओं पर ही मूल्य नियंत्रण लागू होता है। विशेषज्ञों का तर्क है कि सरकार को नीति में संशोधन करके अधिक दवाओं को सूची में शामिल करना चाहिए।