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भारत में नकदी का प्रभुत्व बना हुआ है, डिजिटल भुगतान साथ चल रहे हैं
भारतीय रिजर्व बैंक के अधिकारियों के अनुसार, वर्ष 2016 के बाद से संचलन में मुद्रा दोगुनी से अधिक हो गई है। यह दर्शाता है कि भारत में नकदी और डिजिटल भुगतान एक-दूसरे के विरोध में नहीं, बल्कि साथ-साथ बढ़ रहे हैं।
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भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के शीर्ष अधिकारियों ने कहा है कि नकदी भारतीय अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। आरबीआई के शिरीष चंद्र मुर्मू के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2016 की तुलना में संचलन में मुद्रा की मात्रा दोगुनी से अधिक हो गई है। यह आंकड़े इस धारणा को चुनौती देते हैं कि डिजिटल भुगतान नकदी की जगह ले रहे हैं।
भारत में डिजिटल भुगतान के विकास के बाद भी नकदी का उपयोग कम नहीं हुआ है। बैंकिंग सेवाओं तक पहुंच, ग्रामीण इलाकों में बुनियादी ढांचे की कमी और विभिन्न आर्थिक लेनदेन में नकदी की सांस्कृतिक प्राथमिकता जैसे कारण इसके लिए जिम्मेदार हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की विविध आर्थिक संरचना में नकदी और डिजिटल दोनों ही साधन महत्वपूर्ण हैं।
आरबीआई के आंकड़ों से स्पष्ट है कि भारत में दोनों भुगतान प्रणालियां एक-दूसरे के पूरक के रूप में काम कर रही हैं। डिजिटल लेनदेन तेजी से बढ़ रहे हैं, विशेषकर शहरी क्षेत्रों और युवा आबादी में, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि नकदी की प्रासंगिकता कम हुई है। भारत जैसे बहु-स्तरीय बाजार में दोनों प्रणालियों का सह-अस्तित्व अपरिहार्य है।