LSN News › India

World · India Bureau

सीसीएमबी वैज्ञानिकों ने तपेदिक के अध्ययन के लिए नया आनुवंशिक उपकरण विकसित किया

भारतीय वैज्ञानिकों की एक टीम ने तपेदिक रोग के आंतरिक कार्य तंत्र को समझने के लिए 40 नए शटल वेक्टर बनाए हैं। ये वेक्टर फ्लोरेसेंट मार्कर से लैस हैं जो प्रोटीन को माइक्रोस्कोप के तहत चमकदार बनाते हैं।

LSN India · 16 October 2026

सीसीएमबी वैज्ञानिकों ने तपेदिक के अध्ययन के लिए नया आनुवंशिक उपकरण विकसित किया

केंद्रीय कोशिका और आणविक जीव विज्ञान केंद्र (सीसीएमबी) के वैज्ञानिकों ने तपेदिक (टीबी) बैक्टीरिया के कार्यप्रणाली को बेहतर तरीके से समझने के लिए एक महत्वपूर्ण आनुवंशिक उपकरण विकसित किया है। इस नई तकनीक में 40 नए शटल वेक्टर शामिल हैं जो बैक्टीरिया के प्रोटीन को ट्रैक करने में मदद करते हैं।

ये शटल वेक्टर फ्लोरेसेंट मार्कर से युक्त हैं जो प्रोटीन को माइक्रोस्कोप के अंतर्गत चमकदार रूप में दृश्यमान बनाता है। यह तकनीक वैज्ञानिकों को यह समझने में सक्षम बनाती है कि तपेदिक का बैक्टीरिया कैसे विकसित होता है और मानव शरीर में कैसे कार्य करता है।

इस आनुवंशिक टूलकिट का विकास तपेदिक के विरुद्ध अनुसंधान में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। यह विकास नई चिकित्सीय रणनीतियों और दवाओं के विकास में मदद कर सकता है। अनुसंधान से प्राप्त जानकारी इस संक्रामक रोग से निपटने के लिए बेहतर समाधान खोजने में सहायक साबित हो सकती है।

यह उपकरण न केवल टीबी अनुसंधान के लिए बल्कि अन्य बैक्टीरियल रोगों के अध्ययन में भी उपयोगी साबित हो सकता है। भारत वैश्विक स्तर पर तपेदिक से सर्वाधिक प्रभावित देशों में से एक है, इसलिए ऐसे अनुसंधान कार्य स्वास्थ्य सेवा के लिए महत्वपूर्ण हैं।