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सीडीएससीओ ने मंजूरीशुदा आर-डीएनए दवाओं के लिए निर्यात NOC को माफ किया
भारत में पहले से अनुमोदित जैविक दवाओं के निर्यात को तेजी से मंजूरी देने के लिए सीडीएससीओ ने नई नीति अपनाई है। इस कदम से विदेशी बाजारों में अलग-अलग ब्रांड नामों से दवाएं बेचने वाली कंपनियों को काफी समय की बचत होगी।
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भारतीय औषधि नियामक सीडीएससीओ ने अनुमोदित पुनर्संयोजक डीएनए (आर-डीएनए) दवाओं के निर्यात के लिए अनिवार्य नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) की आवश्यकता को समाप्त कर दिया है। यह निर्णय उन दवाओं के लिए लागू होगा जो भारत में पहले से ही स्वीकृत हैं, लेकिन विदेशी बाजारों में अलग-अलग ब्रांड नामों के तहत बेची जाती हैं।
यह नीति परिवर्तन जैविक दवाओं के निर्माताओं के लिए विशेष रूप से लाभकारी साबित होगा। पहले जहां निर्यात अनुमोदन प्रक्रिया में काफी समय लगता था, अब इस प्रक्रिया को सरल बनाया गया है। इससे कंपनियां अपनी दवाओं को अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में अधिक तेजी से पहुंचा सकेंगी।
सीडीएससीओ की यह पहल भारतीय फार्मास्यूटिकल उद्योग को वैश्विक प्रतिस्पर्धिता बढ़ाने के उद्देश्य से की गई है। जैविक दवाओं का उत्पादन एक जटिल प्रक्रिया है और भारतीय कंपनियां इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
नियामक सरलीकरण के इस कदम से निर्यात समयसीमा में महत्वपूर्ण कमी आने की उम्मीद है। भारतीय दवा निर्माताओं के लिए यह नीति उनके अंतर्राष्ट्रीय विस्तार की योजनाओं को गति प्रदान करेगी और उन्हें प्रतिस्पर्धी बाजार में अपनी स्थिति मजबूत करने में मदद देगी।