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सौर ऊर्जा के अनुरूप बिजली संयंत्रों का लचकदार संचालन करे: केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण
केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण ने बिजली उत्पादन को सौर ऊर्जा की परिवर्तनशीलता के साथ समायोजित करने का प्रस्ताव दिया है। इसके तहत दिन के समय उत्पादन को कम किया जाए और शाम को बढ़ाया जाए।
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केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए) ने भारत की बिजली व्यवस्था को सौर ऊर्जा के अनुसार संचालित करने के लिए एक नई रणनीति प्रस्तावित की है। इस प्रणाली के अंतर्गत पारंपरिक बिजली संयंत्रों को अपने संचालन में लचीलापन लाना होगा ताकि सौर पैनलों द्वारा उत्पादित बिजली के आधार पर उत्पादन को नियंत्रित किया जा सके।
प्राधिकरण की सिफारिशों के अनुसार, दिन के समय जब सौर ऊर्जा का उत्पादन अधिकतम होता है, बिजली संयंत्रों को अपना उत्पादन न्यूनतम स्तर तक कम करना चाहिए। इसके विपरीत, शाम को जब सूर्य की रोशनी कम हो जाती है, संयंत्रों को अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ानी चाहिए। यह दृष्टिकोण ग्रिड की स्थिरता बनाए रखते हुए अक्षय ऊर्जा के उपयोग को अधिकतम करने में मदद करेगा।
सीईए ने दो-पारी संचालन मॉडल का भी सुझाव दिया है, जिससे संयंत्र अपनी क्षमता को अधिक प्रभावी ढंग से उपयोग कर सकें। इस प्रणाली में संयंत्रों को दिन की अलग-अलग अवधियों में विभिन्न भार स्तरों पर काम करने के लिए तैयार रहना होगा।
यह प्रस्ताव भारत की बढ़ती सौर ऊर्जा क्षमता को समायोजित करने और देश की विद्युत ग्रिड को अधिक लचीला बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी रणनीति से बिजली की आपूर्ति में स्थिरता आएगी और नवीकरणीय ऊर्जा के एकीकरण में सुधार होगा।