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2027 की जनगणना में भिखारियों और आवारा लोगों की गणना की पद्धति बदलेगी
आने वाली जनगणना में पहली बार भिखारियों और आवारा लोगों की अलग से गणना नहीं की जाएगी। यह बदलाव पिछली जनगणनाओं से एक महत्वपूर्ण विचलन है जहां इस समूह को गैर-आर्थिक गतिविधि के तहत दर्ज किया जाता था।
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भारत की आगामी जनगणना में सामाजिक सर्वेक्षण की पद्धति में एक महत्वपूर्ण बदलाव आने वाला है। 2027 की जनगणना में भिखारियों और आवारा लोगों को अब अलग से सूचीबद्ध नहीं किया जाएगा, जिस तरह से पिछली जनगणनाओं में किया जाता था।
पिछले दशकों में, भारतीय जनगणना इस आबादी को गैर-आर्थिक गतिविधि की श्रेणी के अंतर्गत दर्ज करती थी। इस पद्धति ने इन सीमांत समूहों की संख्या और उनके आर्थिक-सामाजिक सूचकांकों का एक अलग डेटा बेस तैयार करने में मदद की थी। नई व्यवस्था में यह दृष्टिकोण बदल दिया गया है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, यह निर्णय जनगणना के डेटा संग्रहण को अधिक समावेशी और व्यावहारिक बनाने के लिए लिया गया है। नई पद्धति में इन लोगों को अन्य आर्थिक या सामाजिक श्रेणियों में शामिल किया जाएगा।
यह बदलाव सामाजिक आंकड़ों को इकट्ठा करने के तरीके में एक महत्वपूर्ण संरचनात्मक सुधार माना जा रहा है और इसके निहितार्थ सामाजिक नीति निर्माण में दिखाई देंगे।