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101 साल की उम्र में संग्रहालय चलाती हैं वैल रिपली, बचपन का शौक बना जीवन का काम
वैल रिपली ने आठ साल की उम्र में मिला पहला गुड़िया घर अपने जीवन का केंद्र बना लिया। अब 101 साल की उम्र में वह एक संग्रहालय संचालित करती हैं जो लघु घरों के माध्यम से सामाजिक इतिहास को प्रदर्शित करता है।
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वैल रिपली का जीवन एक छोटी सी गुड़िया के घर से शुरू हुआ। आठ साल की उम्र में मिले इस खिलौने ने उनके भीतर एक ऐसा जुनून पैदा किया जो पूरी सदी तक उनके साथ रहा। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान यह बचपन का साथी खो गया था, लेकिन बाद में इसकी खोज उनके जीवन की सबसे महत्वपूर्ण खोज साबित हुई।
रिपली के संग्रहालय में गुड़िया के घर केवल खिलौने नहीं हैं, बल्कि सामाजिक इतिहास के महत्वपूर्ण दस्तावेज़ हैं। इस संग्रह में 1840 के दशक से लेकर आधुनिक समय तक के लघु घर मौजूद हैं। प्रत्येक संरचना घरेलू जीवन के विकास और जीवनशैली में आने वाले बदलावों को दर्शाती है।
ये मिनिएचर घर परिवार के ढांचे, आंतरिक सजावट, फर्नीचर और दैनिक जीवन की वस्तुओं के माध्यम से विभिन्न कालखंडों की झलक प्रदान करते हैं। इनमें से प्रत्येक गुड़िया का घर उस समय की सांस्कृतिक और आर्थिक परिस्थितियों को प्रतिबिंबित करता है।
लगभग एक सदी तक इन लघु दुनियाओं के साथ अपना जीवन बिताने वाली रिपली के संग्रहालय ने खेल के सामान को ऐतिहासिक महत्व का विषय बना दिया है। उनका यह अनूठा प्रयास दर्शाता है कि कैसे एक बचपन का शौक बहुमूल्य ज्ञान और संरक्षण का साधन बन सकता है।