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पेटेंट दवाओं के महंगे दामों पर केंद्र सरकार को हस्तक्षेप करना चाहिए: केरल हाई कोर्ट
केरल उच्च न्यायालय ने कहा है कि केंद्र सरकार किसी दवा के पेटेंट का उपयोग करके उसे गरीब और सामान्य जनता को गैर-व्यावसायिक आधार पर बेच सकती है। अदालत ने पेटेंट दवाओं की बढ़ती कीमतों से जनता की सुरक्षा के लिए सरकारी हस्तक्षेप की आवश्यकता पर जोर दिया।
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केरल उच्च न्यायालय ने अपने एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा है कि पेटेंट दवाओं की अत्यधिक कीमतों की स्थिति में केंद्र सरकार को सीधे हस्तक्षेप करना चाहिए। अदालत ने माना कि सार्वजनिक स्वास्थ्य की रक्षा के लिए सरकार के पास पेटेंट अधिकारों का उपयोग करते हुए दवाओं का उत्पादन और वितरण करने का अधिकार है।
न्यायालय की मानें तो केंद्र सरकार किसी भी पेटेंटयुक्त दवा को गैर-व्यावसायिक आधार पर जनता को, विशेषकर आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित रोगियों को उपलब्ध कराने के लिए इसका निर्माण कर सकती है। यह दृष्टिकोण देश के दवा नीति में एक महत्वपूर्ण परिवर्तन को दर्शाता है।
कोर्ट का यह निर्णय उन परिस्थितियों को संबोधित करता है जहां पेटेंट सुरक्षा के कारण दवाओं की कीमतें रोगियों की पहुंच से बाहर हो जाती हैं। अदालत ने माना कि राज्य का यह दायित्व है कि वह जनता के स्वास्थ्य अधिकार को सुनिश्चित करे, भले ही इसके लिए पेटेंट नियमों में छूट लेनी पड़े।
इस निर्णय से दवा उद्योग और सार्वजनिक स्वास्थ्य के बीच संतुलन बनाने का मार्ग प्रशस्त हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार के पास अब एक कानूनी आधार है जिससे वह महंगी पेटेंटयुक्त दवाओं को सभी के लिए सुलभ बनाने के लिए आवश्यक कदम उठा सकती है।