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दुर्लभ परिस्थितियों में केंद्र सरकार हवाई किराए पर नियंत्रण कर सकती है
भारत सरकार के नए नियमों के तहत विमान किराए से जुड़े मामलों में केंद्रीय सरकार को हस्तक्षेप की शक्ति दी गई है। यह अधिकार पहले नागरिक उड्डयन महानिदेशालय के पास था।
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भारत सरकार ने नए विनियमों के माध्यम से हवाई किराए संबंधी मामलों में अपनी शक्तियां बढ़ाई हैं। नए नियमों के अनुसार, केंद्रीय सरकार विशिष्ट परिस्थितियों में किराए से संबंधित निर्दिष्ट मामलों में सीधे हस्तक्षेप कर सकती है। यह नीति परिवर्तन नागरिक उड्डयन क्षेत्र के विनियमन में एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत देता है।
इससे पहले किराए निर्धारण संबंधी मुद्दों पर नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) का अधिकार था। नए नियम लागू होने से यह अधिकार अब केंद्रीय सरकार के पास स्थानांतरित हो गया है। सरकार के अनुसार, यह व्यवस्था दुर्लभ और आवश्यक परिस्थितियों में ही लागू होगी।
विमानन उद्योग के विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम उपभोक्ताओं की सुरक्षा और बाजार में स्थिरता बनाए रखने के लिए उठाया गया है। सरकार के पास अब राष्ट्रीय आपातकाल या असाधारण परिस्थितियों में किराए पर नियंत्रण रखने का विकल्प होगा। हालांकि, यह हस्तक्षेप सामान्य बाजार परिस्थितियों में नहीं किया जाएगा, बल्कि केवल विशेष परिस्थितियों तक सीमित रहेगा।
भारतीय विमानन क्षेत्र हाल के वर्षों में तेजी से विकास कर रहा है और यात्रियों की संख्या में भी उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। सरकार की यह नीति विमान सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करते हुए बाजार की गतिविधियों को संतुलित रखने का प्रयास प्रतीत होता है।