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चावल के स्टॉक का खुलासा अनिवार्य, पांच राज्यों को सीमा लगाने की अनुमति
मानसून की कमी से चावल की कीमतों में वृद्धि के बीच केंद्र सरकार ने देशभर के व्यापारियों को अपने स्टॉक की जानकारी देनी अनिवार्य कर दी है। दक्षिण के पांच राज्यों को जमाखोरी रोकने के लिए स्टॉक की सीमा तय करने की अनुमति दी गई है।
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खाद्य मंत्रालय ने छह नवंबर को जारी आदेश के तहत देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में व्यापारियों, थोक विक्रेताओं, खुदरा विक्रेताओं, प्रोसेसर और चावल मिलों को अपने चावल और धान के स्टॉक की घोषणा करने का निर्देश दिया है। यह जानकारी बासमती चावल, प्रीमियम गैर-बासमती चावल, सामान्य गैर-बासमती चावल, उबला हुआ चावल, टूटा हुआ चावल और धान सहित छह श्रेणियों में प्रदान करनी होगी।
खाद्य विभाग के अनुसार, प्रत्येक इकाई को अपने स्टॉक की जानकारी खाद्य स्टॉक पोर्टल (foodstock.dfpd.gov.in) पर हर शुक्रवार को अपडेट करना होगा। पोर्टल पर पंजीकृत न होने वाली या स्टॉक सीमा का उल्लंघन करने वाली इकाइयों के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 की धारा 6 और 7 के तहत कार्रवाई की जाएगी।
एक अलग पत्र में, जो छह नवंबर को जारी किया गया, केंद्र सरकार ने आंध्र प्रदेश, कर्नाटक सहित पांच दक्षिणी राज्यों को स्टॉक की सीमा निर्धारित करने की अनुमति प्रदान की है। यह कदम बढ़ती कीमतों पर नियंत्रण के लिए और उपभोक्ताओं तक सुलभ मूल्य सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।
अधिकारियों के अनुसार, मानसून की विफलता और असमान वितरण के कारण चावल की खरीद में कमी आई है, जिससे बाजार में कीमतों में वृद्धि देखी जा रही है। सरकार का यह कदम जमाखोरी को रोकने और बाजार में स्थिरता लाने के उद्देश्य से लिया गया है।