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लेह हिंसा के बाद गिरफ्तार प्रदर्शनकारियों के मामले वापस लेने की मांग
लेह और कारगिल के नागरिक समाज संगठनों ने प्रशासन के समक्ष अपनी गैर-परक्राम्य मांगें रखी हैं। केंद्र सरकार के साथ होने वाली बातचीत से पहले गिरफ्तार लोगों के मामलों को वापस लेने की मांग की जा रही है।
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लेह और कारगिल के प्रमुख नागरिक समाज संगठन अपनी मांगों को लेकर दृढ़ रुख अपनाए हुए हैं। लेह एपेक्स बॉडी और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस ने इस हफ्ते प्रशासन को एक सूची सौंपी है जिसमें उनकी अ-सुलझाऊ शर्तें दर्ज हैं। इन मांगों में सितंबर 2025 की हिंसक घटनाओं के बाद गिरफ्तार किए गए स्थानीय निवासियों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेना शामिल है।
गृह मंत्रालय के साथ सितंबर में होने वाली बातचीत से पहले यह पहल केंद्र सरकार की ओर से संवेदनशीलता दिखाने का एक प्रयास माना जा रहा है। लेह की घटनाओं में तनाव की स्थिति बनी रही है और विभिन्न समूहों ने अपनी मांगों को लेकर आवाज उठाई है। सरकार के इस रुख से क्षेत्र में कुछ राहत की स्थिति बनने की संभावना है।
नागरिक संगठनों की ओर से सूचित किया गया है कि वे अपनी सभी मांगों पर कोई समझौता नहीं करेंगे। गिरफ्तार प्रदर्शनकारियों की रिहाई और मामलों की वापसी उनकी मुख्य प्राथमिकताओं में शामिल है। आने वाली बातचीत में इन मुद्दों को प्राथमिकता दी जाने की प्रत्याशा की जा रही है।