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ग्रेट निकोबार परियोजना में निकोबारी जनजातीय नेताओं को पक्ष मानने की जरूरत नहीं: केंद्र
कोलकाता उच्च न्यायालय में केंद्र सरकार ने 81,000 करोड़ रुपये की ग्रेट निकोबार परियोजना से जुड़े वनाधिकार मामले में कहा है कि स्थानीय जनजातीय नेता इस केस के आवश्यक पक्ष नहीं हैं।
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केंद्र सरकार ने कोलकाता उच्च न्यायालय को बताया है कि ग्रेट निकोबार परियोजना से संबंधित वनाधिकार मामले में निकोबारी जनजातीय नेताओं को पक्ष मानना न तो आवश्यक है और न ही उचित है। सरकार का यह रुख परियोजना की वैधानिकता को चुनौती देने वाली याचिकाओं के जवाब में दिया गया है।
विवाद का मूल विषय वन अधिकार मान्यता की प्रक्रिया की वैधता से संबंधित है। इसी प्रक्रिया के माध्यम से अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में केंद्र की महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए जमीन उपलब्ध कराई गई थी। 81,000 करोड़ रुपये की यह परियोजना क्षेत्र के विकास में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
स्थानीय जनजातीय समुदायों ने अपने वनाधिकार स्वीकृति की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए हैं। विरोधियों का कहना है कि परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में उचित पारदर्शिता नहीं दिखी। हालांकि, केंद्र सरकार का तर्क है कि सभी कानूनी प्रावधानों का पालन किया गया है।
न्यायालय में चल रहे इस महत्वपूर्ण मामले का फैसला परियोजना के भविष्य को गंभीरता से प्रभावित कर सकता है। वर्तमान में अदालत सभी पक्षों की दलीलों पर विचार कर रही है।