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खनिज कराधान में समानता लाने का प्रस्ताव, राज्यों के अधिकार बरकरार रहेंगे
केंद्र सरकार खनिज कराधान में समानता लाने के लिए एक नई नीति का प्रस्ताव दे रही है। इस कदम से राज्यों के संवैधानिक अधिकार और राजस्व पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
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केंद्रीय खान मंत्रालय देश में खनिज कराधान को समान आधार पर लाने की दिशा में काम कर रहा है। संघीय सरकार का यह कदम खनिज क्षेत्र में पारदर्शिता और एकरूपता सुनिश्चित करने का उद्देश्य रखता है। इस योजना के तहत विभिन्न राज्यों में लागू की जा रही अलग-अलग कर दरों में सामंजस्य स्थापित करा जाएगा।
यूनियन मिनिस्ट्री ऑफ माइंस की ओर से जारी किए गए दिशानिर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि राज्यों के संवैधानिक अधिकार किसी भी परिस्थिति में सीमित नहीं किए जाएंगे। राज्य अपने प्राकृतिक संसाधनों से प्राप्त राजस्व पर पूर्ण नियंत्रण बनाए रखेंगे। केंद्र का लक्ष्य केवल कराधान की प्रणाली में एकरूपता लाना है, न कि राजस्व संग्रहण पर नियंत्रण।
इस प्रस्ताव से देश के विभिन्न भागों में खनन गतिविधियों में निवेश को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। समान कर नीति से निवेशकों को स्पष्ट दिशा-निर्देश मिलेंगे और व्यावसायिक निर्णय लेने में सुविधा होगी। साथ ही, यह कदम भारत के खनिज क्षेत्र को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने में मदद करेगा।
सरकार संबंधित सभी हितधारकों के साथ परामर्श करके इस नीति को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में है। खनन उद्योग के प्रतिनिधियों और राज्य सरकारों की प्रतिक्रिया लेते हुए एक संतुलित दृष्टिकोण अपनाया जा रहा है।