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जर्मनी के डूबे युद्धपोत अब बन गए कीमती संसाधन
प्रथम विश्व युद्ध के बाद जर्मनी के 52 युद्धपोत स्कैपा फ्लो में डुबोए गए थे। एक सदी बाद, इन जहाजों का इस्पात वर्तमान समय में अत्यधिक मूल्यवान संसाधन बन गया है।
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स्कॉटलैंड के तट पर स्थित स्कैपा फ्लो में प्रथम विश्व युद्ध के समापन के बाद जर्मनी के 52 युद्धपोतों को जानबूझकर डुबोया गया था। यह घटना 1919 में हुई थी। लगभग 100 साल बाद, इन जहाजों का इस्पात आधुनिक समय में अमूल्य हो गया है। इस धातु का उपयोग विज्ञान और चिकित्सा संबंधी उपकरण बनाने में किया जाता है।
समुद्र में डूबे हुए ये जहाज कई दशकों तक बहुत कम विकिरण के संपर्क में रहे हैं। 1945 में परमाणु बम विस्फोटों के बाद, समुद्र और मिट्टी में प्राकृतिक रेडियोधर्मी तत्व बिखर गए। इसके कारण युद्ध के बाद बने इस्पात को रेडियोधर्मिता समस्या से जूझना पड़ा है। प्राचीन इस्पात की शुद्धता वर्तमान समय में अत्यधिक कीमती हो गई है।
वैज्ञानिक संस्थानों और चिकित्सा शोधकर्ताओं के लिए यह पुराना इस्पात विशेष महत्व रखता है। विकिरण-मुक्त धातु का उपयोग अत्यंत संवेदनशील उपकरणों के निर्माण में होता है जहां किसी भी प्रकार की रेडियोधर्मी प्रदूषण समस्या नहीं होनी चाहिए। इस कारण से स्कैपा फ्लो में पड़े जर्मन जहाजों की तलाश बढ़ गई है।
इस ऐतिहासिक खोज ने दिखाया कि कैसे युद्ध के समय की विनाशकारी घटनाएं आज के तकनीकी युग में अप्रत्यक्ष लाभ प्रदान कर सकती हैं। समुद्र तल पर सदियों से पड़े इन धातु के भंडार को निकालने की प्रक्रिया अब आर्थिक और वैज्ञानिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बन गई है।