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चेन्नई में नए सचिवालय परियोजना से मछुआरों की आजीविका पर संकट
तमिलनाडु की TVK सरकार द्वारा प्रस्तावित 1,200 करोड़ रुपये के अत्याधुनिक सचिवालय-सभा भवन परিसर से पट्टिनप्पक्कम क्षेत्र के मछुआरों की परंपरागत आजीविका पर गंभीर प्रश्न खड़े हो गए हैं।
LSN India ·
चेन्नई में मुख्यमंत्री विजय के नेतृत्व वाली सरकार की महत्वाकांक्षी परियोजना स्थानीय मछुआरों के लिए अस्तित्व का संकट बन गई है। पट्टिनप्पक्कम में 26 एकड़ में फैले इस आधुनिक सचिवालय-विधानसभा परिसर की योजना से जुड़ी बहस में मछुआरे समुदाय के सदस्य अपनी खतरे में आजीविका को लेकर गंभीर चिंताएं व्यक्त कर रहे हैं।
इस परियोजना से प्रभावित होने वाले मछुआरे अपनी पारंपरिक व्यवसाय को बचाने को लेकर चिंतित दिख रहे हैं। स्थानीय समुदाय के सदस्यों का सवाल है कि विकास परियोजनाओं के लिए उनकी आजीविका का बलिदान क्यों दिया जाए। इस क्षेत्र में दशकों से मछली पकड़ने का काम चल रहा है और यह पीढ़ियों से चली आ रही परंपरा है।
सरकार की इस 1,200 करोड़ रुपये की परियोजना को लेकर विभिन्न हलकों में सवालें उठ रहे हैं। पर्यावरण और स्थानीय समुदाय के अधिकारों को लेकर प्रश्नों का सिलसिला शुरू हो गया है। मछुआरों का आश्चर्य न्यायोचित है कि इतनी बड़ी परियोजना में उनकी आजीविका के विकल्प और पुनर्वास की योजना क्या है।
इस परियोजना का अंतिम निर्णय अभी बाकी है, लेकिन प्रभावित समुदाय के साथ पारदर्शी संवाद की तत्काल आवश्यकता है। विकास और सामाजिक जिम्मेदारी के बीच संतुलन बनाना सरकार का दायित्व है।