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चेन्नई की सड़कों पर ऑटो का दबदबा: 1973 से 2026 तक का सफरनामा

चेन्नई में ऑटोरिक्शाओं की संख्या पिछले दशकों में 200 से बढ़कर लगभग एक लाख तक पहुंच गई है। शहर के निवासियों के लिए यह परिवहन का सबसे तेज और भरोसेमंद माध्यम बना हुआ है, भले ही इससे जुड़ी अपनी समस्याएं हों।

LSN India · 25 August 2026

चेन्नई की सड़कों पर ऑटो का दबदबा: 1973 से 2026 तक का सफरनामा

चेन्नई की सड़कों पर ऑटोरिक्शा एक अभिन्न हिस्सा बन गया है। 1973 में जहां शहर में केवल 200 ऑटोरिक्शाएं थीं, वहीं 2026 तक इनकी संख्या लगभग एक लाख तक पहुंचने की उम्मीद है। यह आंकड़ा शहर के परिवहन ढांचे में इस वाहन की बढ़ती महत्ता को दर्शाता है।

ऑटोरिक्शा चेन्नई के आम नागरिकों के लिए रोजमर्रा की आवश्यकता बन गया है। बसों की तुलना में अधिक सुविधाजनक और टैक्सी से किफायती, ये वाहन शहर की भीड़-भाड़ भरी सड़कों पर तेजी से गंतव्य तक पहुंचाते हैं। जल्दबाजी में रहने वाले यात्रियों के लिए यह परिवहन का सबसे विश्वसनीय विकल्प माना जाता है।

हालांकि, शहरवासियों का ऑटोरिक्शाओं के साथ संबंध प्रेम और नफरत दोनों का मिश्रण रहा है। यातायात नियमों का पालन न करना और अनियंत्रित चलाना इन वाहनों से जुड़ी प्रमुख समस्याएं हैं। इसके बावजूद, जब किसी को जल्दी किसी गंतव्य तक पहुंचना हो, तो ऑटोरिक्शा ही सर्वश्रेष्ठ विकल्प साबित होता है।

चेन्नई की परिवहन प्रणाली में ऑटोरिक्शाओं की भूमिका अब केवल एक सेवा तक सीमित नहीं रही है। ये शहर की संस्कृति और दैनंदिन जीवन का अभिन्न अंग बन चुके हैं, भले ही इनसे जुड़ी चुनौतियां बनी रहती हों।