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चेन्नई में बसें बन गईं जनता की जीवन रेखा, ट्राम सेवा के बाद मिला नया आयाम

चेन्नई की सड़कों पर चलने वाली बसें अपनी भीड़ और रफ्तार के लिए जानी जाती हैं। 1953 में ट्राम सेवा बंद होने के बाद से ये बसें लाखों लोगों के लिए परिवहन का मुख्य साधन बन गई हैं।

LSN India · 25 August 2026

चेन्नई में बसें बन गईं जनता की जीवन रेखा, ट्राम सेवा के बाद मिला नया आयाम

चेन्नई की परिवहन व्यवस्था का इतिहास बसों के विकास के साथ जुड़ा हुआ है। हालांकि 1920 के दशक से ही शहर में बसों का आगमन हुआ था, लेकिन इन्हें वास्तविक महत्व तब मिला जब 1953 में ट्राम सेवा पूरी तरह बंद कर दी गई।

ट्राम सेवा की समाप्ति के बाद, चेन्नई की सड़कों पर बसों का संचालन तेजी से बढ़ा। मेट्रोपॉलिटन ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन (एमटीसी) की बसें शहर के विभिन्न इलाकों को जोड़ने लगीं और आम नागरिकों के लिए सस्ती और सुलभ यातायात का विकल्प बन गईं।

आज की परिस्थिति में चेन्नई की बसें भीड़ से लदी रहती हैं और अपनी तीव्र गति के लिए भी चर्चित हैं। शहर भर में इन बसों की सेवा लाखों लोगों पर निर्भर करते हैं, जो प्रतिदिन इन्हीं के माध्यम से अपनी मंजिल तक पहुंचते हैं।

दशकों से चेन्नई की बसें शहर का अभिन्न अंग बनी हुई हैं। भले ही ये वाहन समय के साथ टूट-फूट के संकेत दिखाते हैं, लेकिन शहर की जनता के लिए ये अब भी सबसे विश्वसनीय परिवहन साधन बनी हुई हैं।