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चेन्नई की रातें जगी रहती हैं, मद्रास की नींद थी जल्दी
चेन्नई शहर ने पिछले दशकों में एक बड़ा बदलाव देखा है। रात के 9 बजे सो जाने वाले मद्रास से यह शहर अब रात 3 बजे बिरयानी की कतार में खड़े होने वाले आधुनिक मेट्रोपोलिस में तब्दील हो गया है।
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चेन्नई की नाइटलाइफ का विकास 1980 के दशक से शुरू हुआ, जब शहर में पहली बार पब और बार खुलने लगे। इस दौरान पारंपरिक मद्रास जहां 9 बजे सायंकाल में व्यावहारिक रूप से सो जाता था, वहीं शहर की संस्कृति में धीरे-धीरे बदलाव आने लगा।
1990 के दशक के उत्तरार्ध में सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र के विस्फोट के साथ चेन्नई की रातें पूरी तरह जाग गईं। बड़ी संख्या में आईटी कर्मचारी रात की पारियों में काम करने लगे, जिससे शहर के चाय की दुकानें और खान-पान के व्यवसाय अधिक समय तक खुले रहने लगे। इस अवधि में नए रेस्तरां, कैफे और खाद्य प्रतिष्ठान तेजी से खुलने लगे।
शहर की रात्रिकालीन अर्थव्यवस्था के विकास के साथ ही खेल सुविधाओं और जिम का भी विस्तार हुआ। ये प्रतिष्ठान अब गहरी रात तक खुले रहने लगे, जिससे चेन्नई की रात्रिकालीन जीवनशैली और भी सक्रिय हो गई। आज का चेन्नई 24 घंटे सजग शहर के रूप में परिणत हो गया है।