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परंपरागत धान बीजों के संरक्षक चेरुवयाल रमण का निधन
वयानाड के प्रख्यात संरक्षणविद चेरुवयाल रमण का निधन हो गया है। रमण ने परंपरागत धान की किस्मों के संरक्षण में जीवनभर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
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वयानाड से आने वाले प्रसिद्ध संरक्षणविद चेरुवयाल रमण ने देश की कृषि विरासत को बचाने के लिए दशकों तक निरंतर प्रयास किए। परंपरागत धान की किस्मों के संरक्षण में उनके अमूल्य योगदान के लिए वे केरल के कृषि समुदाय के प्रतिनिधि के रूप में जाने जाते थे।
रमण की गतिविधियां केवल क्षेत्रीय स्तर तक सीमित नहीं रहीं। वर्ष 2011 में हैदराबाद में आयोजित अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता संरक्षण सम्मेलन में उन्होंने केरल के कृषि हितों का प्रतिनिधित्व किया था। इसी तरह, ब्राजील में आयोजित एक विश्व कृषि सेमिनार में भी उन्होंने भाग लिया और भारतीय कृषि की परंपराओं का परिचय दिया।
उनके इन प्रयासों से देशीय धान की कई प्राचीन किस्मों का संरक्षण संभव हो सका। रमण का मानना था कि आधुनिक कृषि तकनीकों के आने के बाद भी पारंपरिक बीजों का महत्व कम नहीं होता है। उनका यह दृष्टिकोण भारतीय कृषि को जलवायु परिवर्तन और खाद्य सुरक्षा के मुद्दों से जूझने में मदद दे रहा है।
रमण की विरासत भविष्य की पीढ़ियों के लिए एक मार्गदर्शक सिद्ध होगी। उनके निधन से कृषि संरक्षण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण आवाज चली गई है।