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स्कूल की बदहाली पर चिंता: मुख्य न्यायाधीश ने राज्यों से मांगा आंकड़ों का ब्यौरा
भारत के मुख्य न्यायाधीश ने कहा है कि आजादी के 80 साल बाद भी देश के बच्चों को खस्ता हाल स्कूलों में पढ़ने के लिए मजबूर किया जा रहा है। उन्होंने राज्य सरकारों को स्कूल ढांचे संबंधी विस्तृत आंकड़े उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है।
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देश के मुख्य न्यायाधीश ने राज्य सरकारों को पत्र लिखकर स्कूली शिक्षा की बुनियादी ढांचे से जुड़ी गंभीर समस्याओं की ओर ध्यान आकर्षित किया है। उन्होंने कहा कि देश में करोड़ों बच्चों को अत्यंत निम्न स्तर की सुविधाओं वाले स्कूलों में पढ़ाई करनी पड़ रही है, जो मानवीय मर्यादा के विपरीत है।
मुख्य न्यायाधीश के अनुसार, आजादी के आठ दशक बाद भी शिक्षा प्रणाली की बुनियादी अवस्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है। उन्होंने स्पष्ट किया कि स्कूल के हालात ऐसे हैं कि बच्चों के साथ जानवरों जैसा व्यवहार किया जा रहा है। यह स्थिति किसी भी जिम्मेदार सरकार के लिए स्वीकार्य नहीं हो सकती।
इसी संदर्भ में, मुख्य न्यायाधीश ने सभी राज्य सरकारों को अपने अधिकार क्षेत्र में स्कूल की मौजूदा स्थिति, बुनियादी ढांचे, साफ-सफाई की व्यवस्था और अन्य आवश्यक सुविधाओं से संबंधित विस्तृत आंकड़े प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। इसका उद्देश्य स्कूली शिक्षा के क्षेत्र में तेजी से सुधार लाने की दिशा में ठोस कदम उठाना है।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर शिक्षा के लिए उचित बुनियादी ढांचा अत्यंत महत्वपूर्ण है। न्यायपालिका का यह हस्तक्षेप स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है।