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न्यायिक प्रक्रिया को अधिक प्रतिक्रियाशील बनाने की जरूरत पर CJI का आह्वान
भारत के मुख्य न्यायाधीश ने न्यायिक प्रणाली की कार्यप्रणाली में सुधार के लिए गहन विचार-विमर्श करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि न्यायालयों को नागरिकों की जरूरतों के प्रति अधिक संवेदनशील और तेजी से प्रतिक्रिया प्रदान करनी चाहिए।
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भारत के मुख्य न्यायाधीश ने कहा है कि देश की न्यायिक व्यवस्था को आत्मनिरीक्षण की आवश्यकता है ताकि यह नागरिकों की अपेक्षाओं को पूरा कर सके। उन्होंने जोर दिया कि न्यायिक प्रक्रिया को अधिक जवाबदेह और प्रतिक्रियाशील बनाया जाना चाहिए।
CJI ने संकेत किया कि न्यायालयों को अपनी कार्यप्रणाली की समीक्षा करनी चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वे आम जनता की वास्तविक चिंताओं और आवश्यकताओं को समझते हैं। उन्होंने माना कि न्यायिक प्रणाली में सुधार की गुंजाइश है।
इस आह्वान के पीछे का विचार न्यायिक संस्थाओं को अधिक प्रभावी और सुलभ बनाना है। CJI ने कहा कि न्यायिक सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार करना समकालीन भारतीय न्यायव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है।
उन्होंने न्यायाधीशों, वकीलों और न्याय प्रशासन से संबंधित सभी पक्षों से इस दिशा में सहयोग की अपेक्षा की है। CJI का यह बयान न्यायिक सुधारों की आवश्यकता की ओर संकेत करता है जो भारतीय न्यायव्यवस्था को आधुनिक और लोकसंवेदी बना सकें।