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कृषि कार्य में बाल श्रम पर न्यायाधीश की चेतावनी, शिक्षा को खतरा
न्यायाधीश सिद्धारामप्पा कल्याणराव ने कृषि कार्य में बच्चों को नियुक्त करने के खिलाफ कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि यह प्रथा बच्चों के भविष्य को खतरे में डालती है और उन्हें बुनियादी शिक्षा से वंचित करती है।
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न्यायाधीश सिद्धारामप्पा कल्याणराव ने कृषि क्षेत्र में बाल श्रम की प्रथा को लेकर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कृषि कार्य में बच्चों को लगाना उनके शैक्षणिक भविष्य को गंभीर रूप से जोखिम में डालता है।
न्यायाधीश के अनुसार, ऐसी प्रथा से बच्चों को बुनियादी शिक्षा प्राप्त करने का अधिकार छीना जाता है। वे स्कूल न जाकर खेतों में काम करने के लिए मजबूर हो जाते हैं, जिससे उनका बौद्धिक विकास बाधित होता है।
न्यायाधीश ने कहा कि बाल श्रम केवल एक सामाजिक समस्या नहीं है, बल्कि देश के भविष्य को प्रभावित करने वाला एक गंभीर मुद्दा है। उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों और समाज से इस कुप्रथा को खत्म करने के लिए कठोर कदम उठाने की अपील की है।
विशेषज्ञों का मानना है कि कृषि क्षेत्र में बाल श्रम को खत्म करने के लिए परिवारों को आर्थिक सहायता और जागरूकता कार्यक्रम की आवश्यकता है। साथ ही, स्कूली शिक्षा को और आकर्षक और सुलभ बनाना भी इस समस्या के समाधान का महत्वपूर्ण हिस्सा है।