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कानून से टकराव में बच्चों का नाम सार्वजनिक न किया जाए: मुख्य न्यायाधीश

भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत ने कहा है कि 'कानून से टकराव में आए बच्चों' के नाम समाचार माध्यमों और इंटरनेट से दूर रखे जाने चाहिए। उन्होंने जोर दिया कि यह वाक्यांश किसी पहचान को नहीं, बल्कि एक परिस्थिति को दर्शाता है।

LSN India · 10 October 2026

कानून से टकराव में बच्चों का नाम सार्वजनिक न किया जाए: मुख्य न्यायाधीश

भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत ने शनिवार को सुप्रीम कोर्ट की जुवेनाइल जस्टिस कमेटी द्वारा यूनिसेफ के सहयोग से आयोजित एक राष्ट्रीय परामर्श सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए यह बयान दिया। सम्मेलन 'किशोर न्याय (बालकों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम, 2015: दस वर्षों की प्रगति, चुनौतियां और अगले दशक के प्राथमिकताएं' विषय पर केंद्रित था।

मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि किसी कानून के लिए दस वर्ष अवधि अल्पकालीन हो सकती है, लेकिन बाल्यावस्था के संदर्भ में यह आधी अवधि से अधिक है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि 2015 के अधिनियम का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि दूसरा मौका पाने वाले बच्चे समाज के उत्पादक सदस्य बनने की अधिक संभावना रखते हैं, बजाय इसके कि उन्हें अपराधी के रूप में चिह्नित किया जाए।

न्यायाधीश कांत ने कहा कि वास्तविक सफलता तब आती है जब अतीत भविष्य पर अपनी छाया न डाले। इसके लिए उन्होंने समय पर पुरानी रिकॉर्ड को नष्ट करने और 'कानून से टकराव में आए बच्चों' की पहचान को सार्वजनिक क्षेत्र से बाहर रखने का आह्वान किया। उन्होंने बल दिया कि बचपन की गलतियों को किसी व्यक्ति की स्थायी पहचान नहीं बनने देना चाहिए।