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बाल शोषण के मामलों में NCPCR को निष्क्रिय रहना ठीक नहीं: CIC
सूचना आयोग ने राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग को सख्त निर्देश दिए हैं कि वह बाल शोषण की शिकायतों को केवल आगे बढ़ाकर जवाब की प्रतीक्षा नहीं कर सकता। आयोग को सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए और समय पर कार्रवाई सुनिश्चित करनी चाहिए।
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केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) ने राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग (NCPCR) को चेतावनी दी है कि वह बाल शोषण के मामलों में केवल निष्क्रिय भूमिका नहीं निभा सकता। सूचना आयोग का अभिप्राय है कि NCPCR को शिकायतों को दूसरे विभागों को भेजकर उनके जवाब की प्रतीक्षा करते रहने का अधिकार नहीं है।
CIC के निर्देश के अनुसार, NCPCR को बाल संरक्षण के मामलों में सक्रिय निगरानी और अनुवर्ती कार्रवाई करनी चाहिए। आयोग ने कहा है कि यह संस्था अपनी जिम्मेदारी से मुक्त नहीं हो सकती और हर शिकायत के संबंध में व्यक्तिगत रूप से सतर्क रहना चाहिए।
यह निर्णय बाल शोषण के मामलों में NCPCR की प्रतिक्रियाशील रवैये के खिलाफ दायर की गई याचिका पर आया है। सूचना आयोग ने माना कि बाल सुरक्षा एक संवेदनशील विषय है और इसमें किसी भी प्रकार की देरी या लापरवाही स्वीकार्य नहीं है।
CIC का यह आदेश NCPCR को भविष्य में सभी बाल शोषण की शिकायतों पर तत्परता से कार्रवाई करने, निर्धारित समय सीमा में प्रतिक्रिया प्राप्त करने और आवश्यक होने पर स्वतंत्र जांच करने का निर्देश देता है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि NCPCR को अपनी संवैधानिक जिम्मेदारी को पूरी गंभीरता से लेना चाहिए।