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बच्चों को त्यागने के खिलाफ अभिभावकों को चेतावनी दी गई
सरकारी अधिकारियों और सामाजिक संगठनों ने माता-पिता को बाल परित्याग के गंभीर परिणामों के प्रति सचेत किया है। विशेषज्ञ बताते हैं कि यह एक अपराध है जिसके आर्थिक और कानूनी परिणाम हो सकते हैं।
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बाल कल्याण विभाग और सामाजिक संगठनों ने माता-पिता को अपने बच्चों को परित्यागने से दृढ़ता से सावधान किया है। अधिकारियों ने कहा है कि यह कार्य न केवल बच्चों के लिए हानिकारक है बल्कि भारतीय दंड संहिता के तहत एक दंडनीय अपराध भी है।
विशेषज्ञों के अनुसार, बाल परित्याग के मामलों में माता-पिता को कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। बच्चों के संरक्षण के लिए सरकार ने विभिन्न योजनाएं और सहायता कार्यक्रम शुरू किए हैं जिनका लाभ आर्थिक रूप से कमजोर परिवार ले सकते हैं।
अधिकारियों ने सलाह दी है कि जो माता-पिता अपने बच्चों का पालन-पोषण करने में असमर्थ हैं, वे सरकारी कल्याण केंद्रों और एनजीओ से संपर्क करें। इन संस्थाओं के माध्यम से आर्थिक सहायता, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हैं।
बाल कल्याण विभाग ने पारिवारिक परामर्श और काउंसलिंग सेवाओं के माध्यम से संकटग्रस्त परिवारों की मदद करने पर जोर दिया है। सरकार बाल परित्याग की घटनाओं को कम करने के लिए जागरूकता अभियान भी चला रही है।