LSN News › India

World · India Bureau

माओ और सांस्कृतिक क्रांति का चीन पर गहरा असर बना हुआ है

चीन में सांस्कृतिक क्रांति के पांच दशक बाद भी माओ जेडोंग की विरासत देश की राजनीति और समाज पर गहरा प्रभाव डाल रही है। इस अवधि में संदेह की भावना के तहत लाखों लोग प्रभावित हुए थे।

LSN India · 9 September 2026

माओ और सांस्कृतिक क्रांति का चीन पर गहरा असर बना हुआ है

चीन की सांस्कृतिक क्रांति का काल माओ जेडोंग के शासन का सबसे विवादास्पद दौर माना जाता है, जिसका असर आज भी दिखाई देता है। बुजुर्ग हो चुके माओ ने इस अवधि में अपने राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ एक शक्तिशाली अभियान छेड़ा था। उन्होंने छात्रों और समर्थकों को तथाकथित "वर्ग शत्रुओं" के विरुद्ध लामबंद किया, जिनमें ऐसे नेता भी शामिल थे जिन पर "पूंजीवादी रास्ते पर चलने" का आरोप लगाया गया था।

इस आंदोलन में माओ की गहरी संदेह की मानसिकता स्पष्ट थी। वे अपने अधिकार को चुनौती के रूप में देख रहे थे और सत्ता को मजबूत करने के लिए सामाजिक विभाजन का सहारा लिया। इस दौरान बड़े पैमाने पर हिंसा, दमन और सामाजिक उथल-पुथल हुई जिसने चीनी समाज के ताने-बाने को हिलाकर रख दिया।

आधी सदी बाद भी यह अवधि चीन की सामूहिक स्मृति में एक महत्वपूर्ण स्थान बनाए हुए है। सांस्कृतिक क्रांति की विरासत चीनी राजनीति, शिक्षा व्यवस्था और सामाजिक मानदंडों में प्रतिफलित होती है। विद्वानों और इतिहासकारों का मानना है कि इस काल की घटनाएं आधुनिक चीन को समझने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

चीनी सरकार ने इस अवधि को "दस साल की गड़बड़ी" के रूप में संदर्भित किया है। हालांकि, पूर्ण ऐतिहासिक लेखाजोखा आज भी चीन में एक संवेदनशील विषय बना हुआ है। विभिन्न पीढ़ियों पर इसके प्रभाव को समझना चीनी समाज के विकास को समझने के लिए आवश्यक है।