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चीन-रूस की रणनीति से डॉलर के वर्चस्व को चुनौती
भारत सहित ब्रिक्स देशों के समूह में अमेरिकी डॉलर की जगह वैकल्पिक मुद्रा व्यवस्था के प्रयास तेज हो गए हैं। चीन और रूस वैश्विक व्यापार में डॉलर की निर्भरता कम करने के लिए नई रणनीति विकसित कर रहे हैं।
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अमेरिकी डॉलर की अंतरराष्ट्रीय व्यापार में दशकों पुरानी प्रधानता को चुनौती देने के लिए चीन और रूस सक्रिय प्रयास कर रहे हैं। इन देशों की रणनीति का उद्देश्य वैश्विक वित्तीय प्रणाली में विकेंद्रीकरण लाना है और डॉलर पर निर्भरता को कम करना है।
दोनों देश ब्रिक्स जैसे बहु-राष्ट्रीय समूहों के माध्यम से इस लक्ष्य को आगे बढ़ा रहे हैं। भारत समेत अन्य उदीयमान अर्थव्यवस्थाएं इन प्रस्तावों पर विचार कर रही हैं, जो वैकल्पिक भुगतान तंत्र और व्यापार समझौतों को बढ़ावा देते हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि डॉलर की वैश्विक स्थिति में आने वाले वर्षों में महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल सकते हैं। हालांकि, इस संक्रमण की गति कितनी तेज होगी, यह कई आर्थिक और राजनीतिक कारकों पर निर्भर करेगा।
ब्रिक्स का अगला शिखर सम्मेलन इस विषय पर महत्वपूर्ण निर्णय ले सकता है, जहां वैकल्पिक मुद्रा व्यवस्था और स्थानीय मुद्राओं में व्यापार के विस्तार पर विस्तृत चर्चा होने की संभावना है।