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चीन, रूस और भारत के हित: एक जटिल त्रिकोण
तीनों देशों के नेतृत्व के बीच साझा हित कम और विरोधाभास अधिक हैं। प्रत्येक देश के अलग वैश्विक दृष्टिकोण और भिन्न चुनौतियां हैं।
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भारत, चीन और रूस के बीच संबंध जटिल और परस्पर विरोधाभासी रुख अपनाए हुए हैं। इन तीनों शक्तियों का मंच साझा सहयोग की संभावना दिखाता है, लेकिन वास्तविकता में प्रत्येक देश की रणनीतिक प्राथमिकताएं अलग हैं। भू-राजनीतिक गणना में भारत की स्थिति पश्चिमी शक्तियों और एशियाई संतुलन दोनों से प्रभावित होती है।
चीन का ध्यान मुख्यतः क्षेत्रीय प्रभुत्व और वैश्विक आर्थिक नियंत्रण पर केंद्रित है, जबकि रूस पश्चिमी प्रतिबंधों से मुक्ति और यूरोपीय क्षेत्र में अपनी स्थिति बहाल करने पर कार्य कर रहा है। भारत इन दोनों के साथ संबंध बनाए रखते हुए अपने सामरिक स्वायत्तता की रक्षा करने का प्रयास करता है।
तीनों देशों के बीच आर्थिक और भू-राजनीतिक हित कहीं-कहीं मिलते-जुलते हैं, किंतु दीर्घकालिक लक्ष्यों में महत्वपूर्ण अंतर है। चीन और रूस अलग-अलग क्षेत्रों में अपने प्रभाव का विस्तार करना चाहते हैं, जबकि भारत क्षेत्रीय संतुलन और आर्थिक विकास की रणनीति अपनाता है।
वर्तमान राजनीतिक परिवेश में भारत की चुनौती यह है कि वह अपने राष्ट्रीय हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए दोनों शक्तियों के साथ सूझबूझ से संबंध बनाए रखे। यह संतुलनकारी नीति भारत को एशिया-प्रशांत क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी के रूप में स्थापित करती है।