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चीन में बुजुर्गों की संख्या बच्चों से अधिक, जनसांख्यिकीय संकट गहराया
एक-संतान नीति के दशकों बाद चीन एक ऐतिहासिक मोड़ पर पहुंचा है जहां बुजुर्ग आश्रितों का अनुपात 23 प्रतिशत तक पहुंचा है और बाल आश्रितों के 22 प्रतिशत को पीछे छोड़ दिया है। यह परिवर्तन राष्ट्र की आर्थिक संभावनाओं को नए तरीके से चुनौती दे रहा है।
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चीन की जनसांख्यिकीय संरचना में एक महत्वपूर्ण बदलाव सामने आया है। 2025 में वृद्ध आश्रितता अनुपात बाल आश्रितता अनुपात को पहली बार पार कर गया है। बुजुर्गों पर निर्भरता का यह अनुपात 23 प्रतिशत तक पहुंच गया जबकि बच्चों पर निर्भरता में गिरावट आकर 22 प्रतिशत रह गई है।
यह घटनाक्रम चीन की एक-संतान नीति के दीर्घकालीन परिणामों का सबसे स्पष्ट संकेत है। जनता के कम जन्म दर और कई दशकों तक लागू रही इस प्रतिबंधात्मक नीति का असर अब स्पष्ट दिख रहा है। पिछली कई पीढ़ियों में सीमित प्रजनन के कारण चीन की आबादी की संरचना तेजी से बदली है।
इस जनसांख्यिकीय परिवर्तन के राष्ट्रव्यापी आर्थिक प्रभाव गहरे हैं। कार्यशील आबादी में कमी और सेवानिवृत्त व्यक्तियों की संख्या में वृद्धि से स्वास्थ्यसेवा, पेंशन और सामाजिक सुरक्षा तंत्र पर अभूतपूर्व दबाव पड़ रहा है। सरकार को सार्वजनिक वित्त और कल्याणकारी योजनाओं के बारे में पुनर्विचार करना होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह संकट चीन की भविष्य की आर्थिक वृद्धि के लिए एक महत्वपूर्ण बाधा बन सकता है। श्रम बाजार में कार्यशील जनसंख्या की कमी से उत्पादकता प्रभावित होगी और सामाजिक कल्याण व्यय में वृद्धि अवश्यंभावी है।