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चीन ने 27,000 बार क्लाउड सीडिंग की, क्या दिल्ली में काम करेगी?
चीन ने वायु प्रदूषण और सूखे से निपटने के लिए क्लाउड सीडिंग तकनीक का व्यापक इस्तेमाल किया है। विशेषज्ञ बता रहे हैं कि क्या भारत की राजधानी में यह तरीका कारगर साबित हो सकता है।
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चीन ने अब तक 27,000 से अधिक बार कृत्रिम वर्षा के लिए क्लाउड सीडिंग का प्रयोग किया है। यह तकनीक बादलों में रासायनिक पदार्थ छिड़ककर कृत्रिम रूप से वर्षा कराने की प्रक्रिया है। चीन ने इस तरीके का उपयोग प्रदूषण कम करने, सूखे की परिस्थिति से लड़ने और बड़े आयोजनों के दौरान मौसम नियंत्रित करने में किया है।
दिल्ली में वायु प्रदूषण की गंभीर समस्या को देखते हुए क्लाउड सीडिंग की प्रासंगिकता पर विचार किया जा रहा है। भारतीय मौसम विज्ञान और संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक निश्चित शर्तों के तहत प्रभावी साबित हो सकती है। हालांकि, इसकी सफलता मौसम की स्थिति, उपलब्ध बादलों की मात्रा और आर्द्रता जैसे कारकों पर निर्भर करती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, दिल्ली में क्लाउड सीडिंग करना तकनीकी और पर्यावरणीय दृष्टि से चुनौतीपूर्ण है। सर्दियों के महीनों में जब प्रदूषण सबसे अधिक होता है, उस समय बादलों की उपलब्धता सीमित होती है। इसके अलावा, इस प्रक्रिया की प्रभावशीलता और पर्यावरणीय प्रभाव को लेकर अभी और अध्ययन की आवश्यकता है।
भारत में क्लाउड सीडिंग का पायलट प्रोजेक्ट कुछ राज्यों में चलाया जा रहा है, लेकिन दिल्ली जैसे घनी आबादी वाले शहर में इसका व्यावहारिक अनुप्रयोग जटिल है। माहिर लोग सुझाते हैं कि प्रदूषण नियंत्रण के लिए क्लाउड सीडिंग के साथ-साथ अन्य दीर्घकालीन उपाय भी आवश्यक हैं।