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चीन का पहला परमाणु परीक्षण: विश्व राजनीति में नया मोड़
1964 में चीन के परमाणु परीक्षण ने अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा व्यवस्था को बदल दिया। यह घटना परमाणु शक्तियों के अधिकार को पांच देशों तक विस्तारित करने का प्रतीक थी।
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चीन के परमाणु क्लब में प्रवेश ने वैश्विक शक्ति संतुलन को नाटकीय रूप से बदल दिया। इससे पहले परमाणु हथियार केवल संयुक्त राज्य अमेरिका, सोवियत संघ, ब्रिटेन और फ्रांस के पास थे। चीन के सफल परीक्षण ने पूर्वी एशिया में सुरक्षा गतिशीलता को पुनर्व्यवस्थित किया।
इस घटना के तुरंत बाद वैश्विक राजनीतिक मंच पर परमाणु प्रसार की चिंताएं प्रमुख होने लगीं। विकासशील देशों के बीच परमाणु क्षमता प्राप्त करने की संभावना ने प्रमुख शक्तियों को गंभीरता से सचेत किया। अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने महसूस किया कि परमाणु हथियारों का विस्तार रोकना एक अनिवार्य आवश्यकता बन गई थी।
शीत युद्ध के दौरान चीन की परमाणु क्षमता ने एशिया-प्रशांत क्षेत्र में नई सुरक्षा चुनौतियों का सृजन किया। भारत सहित पड़ोसी देशों को अपनी सुरक्षा नीतियों पर पुनर्विचार करना पड़ा। यह घटना परमाणु हथियार संधि जैसी बहुपक्षीय व्यवस्थाओं की स्थापना की ओर एक महत्वपूर्ण चेतावनी साबित हुई।