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चीन में वनस्पति संरक्षण से भूजल संकट गहरा: 2003-2015 का अध्ययन
चीन के लोएस पठार पर वनस्पति पुनरुद्धार कार्यक्रम ने भूजल भंडार में तेजी से गिरावट का कारण बना। उपग्रह डेटा से पता चलता है कि वनस्पति वृद्धि और भूजल सूखे के बीच सीधा संबंध है।
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चीन के लोएस पठार पर किए गए एक व्यापक अध्ययन में शोधकर्ताओं ने पाया है कि 1999 में शुरू किए गए वनस्पति संरक्षण कार्यक्रम से इस क्षेत्र में भूजल भंडार में उल्लेखनीय गिरावट आई है। सेंट्रोलिन के अध्ययन के अनुसार, 2003 से 2015 की अवधि में भूजल संकट तेजी से बढ़ा है।
अध्ययन में पाया गया कि जहां एक ओर वनस्पति तेजी से बढ़ रही थी, वहीं दूसरी ओर भूजल में सूखे की स्थिति गंभीर हो रही थी। इस दौरान भूजल में गिरावट केवल सांख्यिकीय दृष्टि से ही महत्वपूर्ण नहीं थी, बल्कि यह प्रभाव क्षेत्र के एक बड़े हिस्से में फैला हुआ था और सूखे की तीव्रता भी अधिक थी।
शोधकर्ताओं ने उपग्रह डेटा का विश्लेषण कर इस संबंध को स्पष्ट किया है। उपग्रह से प्राप्त जानकारी से पता चलता है कि बढ़ती हुई वनस्पति मिट्टी से अधिक जल सोख लेती है, जिससे भूजल स्तर में कमी आती है। यह अध्ययन भूमि संरक्षण नीतियों और जल संसाधन प्रबंधन के बीच संतुलन खोजने की महत्ता को रेखांकित करता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह के अनुसंधान से सरकारों को पर्यावरण संरक्षण और जल सुरक्षा दोनों को ध्यान में रखते हुए भविष्य की योजनाएं बनाने में मदद मिलेगी। लोएस पठार की स्थिति एशिया के अन्य क्षेत्रों के लिए भी एक चेतावनी है जहां समान पारिस्थितिक परियोजनाएं चलाई जा रही हैं।