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अंतरराष्ट्रीय कानून का आधार नहीं: रूसी तेल पर अमेरिकी प्रतिबंध को चीन ने ठुकराया
चीन ने अमेरिका के रूसी ऊर्जा खरीद पर प्रतिबंध लगाने के प्रस्ताव को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताते हुए खारिज कर दिया है। भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा की जरूरत पर जोर देते हुए अमेरिकी कदमों पर सतर्क रहने का संकेत दिया है।
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चीन ने अमेरिका के रूसी तेल और गैस के बड़े खरीदारों पर टैरिफ लगाने के विधायी प्रस्ताव को कड़ी आलोचना की है। बीजिंग का कहना है कि यह कदम अंतरराष्ट्रीय कानून के किसी भी आधार पर नहीं है और संयुक्त राष्ट्र की मंजूरी के बिना लिया गया है।
चीनी विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि देश राष्ट्रीय हितों के अनुरूप अपनी विदेश नीति तय करता है और किसी अन्य देश के दबाव में नहीं आता। अमेरिका द्वारा एकतरफा प्रतिबंधों के माध्यम से अन्य राष्ट्रों के व्यापारिक निर्णयों को प्रभावित करने के प्रयास को चीन ने अस्वीकार्य बताया है।
इस बीच भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा की आवश्यकता को प्राथमिकता देते हुए सतर्कता बरतने की बात कही है। नई दिल्ली ने संकेत दिया है कि वह अमेरिकी विधायी कदमों पर गहराई से निगरानी रखेगा और अपने व्यापारिक हितों की रक्षा के लिए आवश्यक उपाय लेने को तैयार है।
एशिया-प्रशांत क्षेत्र में ऊर्जा आपूर्ति की महत्ता को देखते हुए, भारत समेत कई देश रूसी ऊर्जा संसाधनों पर निर्भर हैं। अमेरिकी प्रतिबंध की धमकी से क्षेत्रीय अर्थव्यवस्थाओं पर असर पड़ने की आशंका व्यक्त की जा रही है। विश्लेषकों का मानना है कि ऐसे एकतरफा कदमों से बहुपक्षीय व्यापार व्यवस्था को नुकसान पहुंचता है।