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शहरी शासन में सुधार के लिए राजस्व स्वायत्तता जरूरी: नीति आयोग
नीति आयोग के अनुसार शहरी केंद्रों को राज्य की राजधानी से प्रभावी ढंग से संचालित नहीं किया जा सकता। स्थानीय मुद्दों से निपटने के लिए उन्हें पर्याप्त अधिकार, संसाधन और संस्थागत क्षमता की आवश्यकता है।
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शहरी प्रशासन को बेहतर बनाने के लिए राजस्व संबंधी वित्तीय स्वायत्तता आवश्यक है। नीति आयोग के अनुसार, शहरी केंद्रों को राज्य सरकारों के प्रत्यक्ष नियंत्रण से मुक्त होकर स्वतंत्र रूप से काम करना चाहिए।
नीति आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, शहरों को प्रभावी ढंग से प्रशासित करने के लिए केवल राज्य की राजधानी से निर्देश नहीं चल सकते। स्थानीय समस्याओं का समाधान करने के लिए शहरी निकायों के पास आवश्यक अधिकार, वित्तीय संसाधन और संस्थागत क्षमता होनी चाहिए।
नीति आयोग का मानना है कि शहरी क्षेत्रों में अधिक लोकतांत्रिक और स्वायत्त प्रणाली स्थापित करने से प्रशासनिक कार्यक्षमता में वृद्धि होगी। इससे नगरीय विकास योजनाओं को स्थानीय जरूरतों के अनुसार ढाला जा सकेगा।
शहरी शासन में यह सुधार देश के समग्र विकास के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मत है कि स्थानीय स्तर पर निर्णय लेने की प्रक्रिया को मजबूत करने से नागरिक सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार आएगा।