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रामायापटनम बंदरगाह के निजीकरण के खिलाफ सीटू का विरोध
भारतीय मजदूर संघ (सीटू) ने रामायापटनम बंदरगाह के निजीकरण की योजना का विरोध किया है। संगठन का मानना है कि बंदरगाह के 80 प्रतिशत से अधिक निर्माण पूरा होने के बाद इसे निजी हाथों में देना गलत निर्णय है।
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भारतीय मजदूर संघ (सीटू) ने रामायापटनम बंदरगाह के निजीकरण की सरकारी योजना पर सवाल उठाए हैं। संगठन के नेताओं ने पूछा है कि जब बंदरगाह का 80.55 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा हो चुका है और वह राजस्व उत्पन्न करने की स्थिति में है, तो सरकार इसे निजी क्षेत्र को क्यों सौंपना चाहती है।
सीटू का तर्क है कि इस कदम से आम जनता को कोई लाभ नहीं मिलेगा और लाभ केवल निजी पूंजीपतियों के हाथों में चली जाएगी। मजदूर संगठन का मानना है कि बंदरगाह जैसे रणनीतिक महत्व के ढांचे को सार्वजनिक क्षेत्र में ही रहना चाहिए ताकि राष्ट्रीय हित सुरक्षित रहे।
यह मुद्दा बुनियादी ढांचे परियोजनाओं के निजीकरण को लेकर चल रही व्यापक बहस का हिस्सा है। श्रमिक संगठनों का आरोप है कि निजीकरण से रोजगार के अवसर कम होते हैं और सेवाएं महंगी हो जाती हैं।