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संविधान की रक्षा करें, पक्षपातपूर्ण लक्ष्यों का विरोध करें: सिविल सेवकों को आह्वान
नागरिक समाज संगठनों के एक गठबंधन ने सेवारत सरकारी कर्मचारियों से संविधान के प्रति अपनी प्रतिबद्धता बनाए रखने का आग्रह किया है। खुले पत्र में संस्थागत स्वतंत्रता में कमी और असहमति के दमन की चिंता व्यक्त की गई है।
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नागरिक समाज के प्रमुख संगठनों के एक समूह ने भारत के सेवारत सिविल सेवकों को एक खुले पत्र के माध्यम से संविधानिक मूल्यों की रक्षा करने और किसी भी पक्षपातपूर्ण उद्देश्य का प्रतिरोध करने का आह्वान किया है। इस पत्र में देश के संस्थागत ढांचे में चिंताजनक बदलाव की ओर ध्यान आकर्षित किया गया है।
पत्र में कहा गया है कि सरकारी तंत्र की स्वतंत्रता में उल्लेखनीय गिरावट आई है और विभिन्न स्तरों पर नीति-निर्माताओं के बीच संवाद की कमी देखी जा रही है। समूह ने यह भी उजागर किया है कि विभिन्न दृष्टिकोण और असहमति के प्रति एक दमनकारी रवैया अपनाया जा रहा है।
इस आह्वान में जोर दिया गया है कि सरकारी कर्मचारियों को भारतीय संविधान की बुनियादी भावना को बनाए रखने के लिए सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। समूह का मानना है कि संवैधानिक संस्थाएं तभी प्रभावी ढंग से काम कर सकती हैं जब वे राजनीतिक दबावों से स्वतंत्र रहें।
यह कदम एक ऐसे समय में उठाया गया है जब लोकतांत्रिक संस्थाओं और नागरिक स्वतंत्रताओं को लेकर विभिन्न स्तरों पर बहस चल रही है। नागरिक समाज के इस समूह का कहना है कि केवल एक मजबूत और स्वतंत्र नौकरशाही ही संवैधानिक लोकतंत्र की सुरक्षा सुनिश्चित कर सकती है।