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आगामी चुनावों में पुरानी मतदाता सूची का इस्तेमाल करें: नागरिक समूह
नागरिक समाज संगठनों ने चुनाव आयोग के प्रमुख को हटाने और मतदाता सूची का सार्वजनिक लेखा-जोखा की मांग की है। वरिष्ठ वकील कपिल सिबल ने पूछा है कि अगर स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव खतरे में हैं तो लोकतंत्र बचा क्या रह गया।
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देश भर के नागरिक समाज समूहों ने आगामी चुनावों में नई मतदाता सूची से पहले की सूची (एसआईआर) का उपयोग करने की मांग की है। इन समूहों ने एसआईआर के संपूर्ण रद्दीकरण की भी पुकार लगाई है।
इन संगठनों की मांग में चुनाव आयोग के मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने का प्रस्ताव भी शामिल है। साथ ही, उन्होंने चुनाव आयोग के फैसलों की स्वतंत्र जांच और मतदाता सूची का सार्वजनिक सामाजिक लेखा-जोखा (ऑडिट) करवाने की मांग की है।
वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिबल ने इस मुद्दे पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि यदि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया को खतरा है तो लोकतंत्र का भविष्य क्या रह जाता है। उनके अनुसार, चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वसनीयता लोकतांत्रिक व्यवस्था की नींव है।
यह मांग विभिन्न नागरिक अधिकार संगठनों और कानूनी विशेषज्ञों से उठी है जो मतदाता सूची में पारदर्शिता और सत्यापन की आवश्यकता पर बल दे रहे हैं। इन समूहों का तर्क है कि चुनावी प्रणाली की विश्वसनीयता के लिए तत्काल सुधार की जरूरत है।