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गरीब छात्रों को कानून में करियर बनाने में मदद करें: मुख्य न्यायाधीश
भीमराव अंबेडकर पर राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत ने आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों की पहचान कर उन्हें वित्तीय सहायता प्रदान करने का आह्वान किया है।
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भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत ने विचारक और संविधानविद् डॉ. भीमराव अंबेडकर पर आयोजित एक राष्ट्रीय सम्मेलन में न्यायिक क्षेत्र में विविधता लाने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि समाज के वंचित वर्गों से आने वाले प्रतिभाशाली छात्रों को कानून में अपना करियर बनाने से रोकने के लिए आर्थिक बाधाएं नहीं होनी चाहिए।
मुख्य न्यायाधीश ने संगठनों और शैक्षणिक संस्थानों से इन छात्रों की सुचिन्हित रूप से पहचान करने और उन्हें आवश्यक वित्तीय सहायता प्रदान करने की जिम्मेदारी लेने की अपील की है। उनका दृष्टिकोण यह है कि कानूनी पेशे में सामाजिक विविधता लाने से न्याय प्रणाली को अधिक समावेशी और प्रभावी बनाया जा सकता है।
अंबेडकर के विचारों के अनुरूप, मुख्य न्यायाधीश कांत ने जोर दिया कि गरीबी किसी योग्य व्यक्ति को उच्च न्यायिक पदों तक पहुंचने से वंचित नहीं कर सकती। उन्होंने कहा कि समाज को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि प्रतिभा और योग्यता को आर्थिक परिस्थितियों के आधार पर दबाया न जाए।
इस पहल के माध्यम से मुख्य न्यायाधीश न्यायिक संस्थानों और समाज के बीच एक सेतु बनाने का प्रयास कर रहे हैं ताकि कानूनी शिक्षा सभी वर्गों के लिए सुलभ हो सके। उनका यह कदम संविधान के मूल्यों को बनाए रखने और सामाजिक न्याय को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।