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न्याय नागरिकों तक पहुंचना चाहिए: मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत
भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत ने बिहार में पहले पीड़ित अधिकार केंद्र का उद्घाटन करते हुए कहा कि न्याय अदालत की चहारदीवारी तक सीमित नहीं रह सकता। उन्होंने जोर दिया कि कानूनी व्यवस्था कमजोर, हाशिए पर रहने वाले और कानूनी प्रक्रिया से अनभिज्ञ लोगों तक भी पहुंचनी चाहिए।
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बिहार में पीड़ित अधिकार केंद्र (वीआरसी) की स्थापना के अवसर पर भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत ने न्यायिक व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण बदलाव का संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि न्याय को केवल कानूनी दस्तावेजों और अदालत के कमरों में सीमित नहीं रहना चाहिए बल्कि समाज के सबसे कमजोर वर्गों तक पहुंचना चाहिए।
सीजेआई कांत का मानना है कि न्याय की व्यवस्था में उन लोगों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए जो आर्थिक, सामाजिक या शैक्षणिक कारणों से कानूनी प्रक्रिया को समझने और उसका लाभ उठाने में असमर्थ हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि असली न्याय तभी संभव है जब वह आम नागरिकों, खासकर वंचित वर्गों तक पहुंचे।
बिहार में स्थापित यह पीड़ित अधिकार केंद्र न्यायिक व्यवस्था को अधिक समावेशी और सुलभ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। केंद्र अपराध के शिकारों और उन लोगों के अधिकारों की रक्षा करने का काम करेगा जो न्यायिक प्रक्रिया में अपनी आवाज नहीं उठा पाते हैं।
सीजेआई की यह पहल भारतीय न्याय प्रणाली को अधिक मानवीय और लोकतांत्रिक बनाने की दिशा में एक प्रशंसनीय प्रयास है। इसका उद्देश्य न्यायिक व्यवस्था को सरल और सभी के लिए सुलभ बनाना है।