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महिला वकीलों को न्यायाधीश बनाने के लिए CJI की अपील
भारत के मुख्य न्यायाधीश ने उच्च न्यायालयों से कहा है कि वे सर्वोच्च न्यायालय में प्रैक्टिस करने वाली महिला वकीलों को न्यायपीठ के लिए विचार करें। इससे न्यायपालिका में महिलाओं की भागीदारी बढ़ने की उम्मीद है।
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भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने देश भर के उच्च न्यायालयों की कॉलेजियमों से कहा है कि वे न्यायाधीश के पद के लिए महिला वकीलों के चयन के दायरे को व्यापक करें। उन्होंने माना है कि इस दिशा में एक सुव्यवस्थित प्रयास की आवश्यकता है ताकि सर्वोच्च न्यायालय में कार्यरत प्रतिभाशाली महिला अधिवक्ताओं को उच्च न्यायालयों में न्यायिक पद के लिए नियुक्त किया जा सके।
CJI की इस पहल का उद्देश्य न्यायिक प्रणाली में लैंगिक विविधता और समानता को बढ़ावा देना है। उन्होंने यह सुझाव दिया है कि उच्च न्यायालयों की कॉलेजियमें अपने राज्यों में सर्वोच्च न्यायालय में कार्यरत महिला वकीलों पर विचार करें और उन्हें न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत करने की संभावना का मूल्यांकन करें।
यह कदम न्यायपालिका में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञ मानते हैं कि उच्च न्यायालयों में महिला न्यायाधीशों की संख्या बढ़ने से न्यायिक प्रक्रिया में विविधतापूर्ण दृष्टिकोण आएगा और महिलाओं के अधिकारों की रक्षा में अतिरिक्त संवेदनशीलता आएगी।
CJI की यह अपील न्यायिक नियुक्तियों में पारदर्शिता और योग्यता के आधार पर चयन के सिद्धांत को मजबूत करने का भी प्रयास है। इससे उम्मीद है कि उच्च न्यायालयों की कॉलेजियमें इस दिशा में सकारात्मक कदम उठाएंगी और योग्य महिला अधिवक्ताओं को न्यायाधीश के पद के लिए विचार करेंगी।