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CJI सूर्य कांत ने स्नातकों से संविधान की रक्षा का आह्वान किया
राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, बेंगलुरु में मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि कानूनी शिक्षा केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। उन्होंने जोर दिया कि स्नातकों को विविध विचारधाराओं के साथ जुड़ने के लिए तैयार होना चाहिए।
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भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत ने बेंगलुरु के राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (NLSIU) में एक संबोधन के दौरान स्नातकों से स्वतंत्रता की रक्षा और संविधान के मूल्यों को बनाए रखने का आह्वान किया।
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि कानूनी शिक्षा का क्षेत्र केवल शैक्षणिक सीमाओं तक सीमित नहीं होना चाहिए। उनका मानना है कि कानून के छात्रों को अपनी पढ़ाई के माध्यम से विभिन्न दृष्टिकोण और विचारधाराओं से जुड़ने की क्षमता विकसित करनी चाहिए।
CJI ने जोर देते हुए कहा कि युवा कानूनविद् भारतीय लोकतांत्रिक व्यवस्था के मूल मूल्यों और संवैधानिक सिद्धांतों की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने स्नातकों को अपने पेशेवर करियर में नैतिकता और सामाजिक जिम्मेदारी को प्राथमिकता देने के लिए प्रेरित किया।
यह संबोधन एक प्रमुख कानूनी संस्थान में दिया गया था, जहां मुख्य न्यायाधीश ने न्यायपालिका और कानूनी पेशेवरों की भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला।