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राजनीतिक प्रदर्शन जारी रहें, लेकिन न्यायालय को विवाद में न खींचें: CJI
मुख्य न्यायाधीश ने खुली अदालत में कहा कि लोकतांत्रिक अधिकारों का प्रयोग होना चाहिए, लेकिन न्यायपालिका को इसमें शामिल नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने वकीलों, मुवक्किलों और अदालत कर्मचारियों को किसी भी असुविधा से बचाने पर जोर दिया।
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भारत के मुख्य न्यायाधीश ने सार्वजनिक हित में एक महत्वपूर्ण बयान जारी करते हुए कहा है कि नागरिकों को अपने लोकतांत्रिक और राजनीतिक अधिकारों का प्रयोग करने का पूर्ण अधिकार है। हालांकि, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इस प्रक्रिया में न्यायिक संस्थाओं को विवाद का विषय नहीं बनाया जाना चाहिए।
खुली अदालत में अपना विचार व्यक्त करते हुए मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि न्यायालय के कामकाज में किसी भी प्रकार की बाधा नहीं आनी चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अदालत के परिसर में आने वाले वकीलों, मुवक्किलों और कर्मचारियों को किसी भी तरह की असुविधा का सामना नहीं करना पड़ना चाहिए।
मुख्य न्यायाधीश ने कानूनी पेशेवरों और प्रशासनिक कर्मचारियों से आग्रह किया है कि वे सुनिश्चित करें कि न्यायालय के दैनिक कामकाज में निर्बाध चलन बना रहे। उनका यह कथन न्यायपालिका की स्वतंत्रता और निष्पक्षता के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
न्यायिक व्यवस्था की सुचारू कार्यप्रणाली सुनिश्चित करने के लिए यह बयान एक महत्वपूर्ण संदेश माना जा रहा है। मुख्य न्यायाधीश का यह रुख लोकतांत्रिक मूल्यों और न्यायिक स्वतंत्रता दोनों के बीच संतुलन बनाए रखने की कोशिश को दर्शाता है।