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सौरव दास और आशुतोष रंका की हिरासत पर CJP ने PM मोदी को निशाना साधा
भारतीय न्याय पेशेवर अभिजीत डिप्के ने दोनों कार्यकर्ताओं की विस्तारित हिरासत की आलोचना करते हुए कहा कि उनका पहला अपराध राष्ट्रगान के साथ प्रदर्शन करना था। डिप्के के अनुसार उनका दूसरा अपराध अपनी मांग से पीछे न हटना है।
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भारतीय न्यायिक माहौल में एक बार फिर से नागरिक अधिकारों और राज्य शक्ति के बीच तनाव सामने आया है। कानूनी क्षेत्र के प्रमुख व्यक्तित्व अभिजीत डिप्के ने सौरव दास और आशुतोष रंका की लंबी अवधि की कानूनी हिरासत पर प्रश्न उठाते हुए सरकार पर सीधा हमला किया है।
डिप्के ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि दोनों कार्यकर्ताओं के विरुद्ध लगाए गए आरोपों में मूलभूत समस्या है। उन्होंने कहा कि इन दोनों का पहला कथित अपराध जंतर मंतर पर राष्ट्रीय झंडे के साथ प्रदर्शन करना था, जो संवैधानिक अधिकार का हिस्सा है।
डिप्के की आलोचना का मूल बिंदु यह है कि आगे चलकर इन कार्यकर्ताओं का दूसरा अपराध अपनी मांगों से पीछे न हटना था। उन्होंने निहित संदेश दिया है कि असहमति को व्यक्त करने और अपने विचार पर अडिग रहने को ही अब अपराध की श्रेणी में डाला जा रहा है।
यह प्रकरण भारत में नागरिक स्वतंत्रता और राज्य नियंत्रण के बीच चल रहे व्यापक विवाद का हिस्सा है। कानूनी समुदाय के विभिन्न वर्गों ने पिछली अवधि में ऐसे मामलों में हिरासत की अवधि को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं।