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आईआईटी कानपुर से जंतर मंतर तक: सीजेपी रंका का सफल सफर
भारतीय न्यायपालिका में प्रमुख भूमिका निभाने वाले न्यायाधीश अशुतोष रंका ने अपनी शैक्षणिक उत्कृष्टता और जन आंदोलनों के माध्यम से एक अनूठा मार्ग तैयार किया है। प्रतिष्ठित आईआईटी कानपुर से लेकर राजधानी के हृदय जंतर मंतर तक उनकी यात्रा भारतीय प्रशासन में एक नया आयाम जोड़ती है।
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न्यायिक सुधार और सार्वजनिक हित के मुद्दों पर अपनी सक्रिय भूमिका के लिए चर्चित रहे न्यायाधीश अशुतोष रंका का पेशेवर जीवन भारत के शीर्ष तकनीकी संस्थान से शुरू हुआ था। आईआईटी कानपुर से प्राप्त उनकी मजबूत तकनीकी और वैज्ञानिक पृष्ठभूमि ने उन्हें जटिल कानूनी और प्रशासनिक मामलों को विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण से देखने की क्षमता प्रदान की है।
रंका द्वारा सार्वजनिक हित के विभिन्न मुद्दों पर दिल्ली के जंतर मंतर में आयोजित आंदोलनों और जागरूकता कार्यक्रमों में भागीदारी उनकी सामाजिक जिम्मेदारी की प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करती है। न्यायपालिका के भीतर उनकी भूमिका और बाहरी सामाजिक गतिविधियों का यह संयोजन भारतीय प्रशासकीय नेतृत्व में एक दुर्लभ उदाहरण माना जाता है।
रंका का करियर उन नेताओं की एक नई पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करता है जो संस्थागत सीमाओं के भीतर रहते हुए भी सामाजिक परिवर्तन के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनके शिक्षा से लेकर सार्वजनिक जीवन तक के मार्ग ने भारतीय प्रशासकीय व्यवस्था में विचारशील और समाज-केंद्रित नेतृत्व की संभावनाओं को नए ढंग से परिभाषित किया है।